वेदांता पावर प्लांट हादसे पर हिंद मजदूर खदान फेडरेशन का बड़ा हमला, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

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बिलासपुर (Social Activity BSP)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए भीषण औद्योगिक हादसे को लेकर हिंद मजदूर खदान फेडरेशन (हिंद मजदूर सभा) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। फेडरेशन के उप महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हादसे की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।

उन्होंने कहा कि बार-बार हो रहे औद्योगिक हादसे सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं। हर हादसे के बाद जांच की घोषणा तो होती है, लेकिन रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली जाती है। इससे साफ है कि कंपनियां और प्रशासन सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर नहीं हैं।

फेडरेशन ने आरोप लगाया कि वेदांता प्लांट में हुए हादसे में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों की जान के साथ हो रहे खिलवाड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि देश में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बड़े औद्योगिक हादसे सामने आए हैं। उन्होंने 2017 में रायगढ़ के एनटीपीसी प्लांट हादसे, तमिलनाडु के नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन हादसे, बिहार के बाढ़ थर्मल पावर स्टेशन हादसे और हाल के अन्य मामलों का हवाला देते हुए कहा कि हर बार मजदूरों की जान जाती है, लेकिन जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब तक 24 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के दौरान प्लांट में अफरा-तफरी का माहौल था और एक ही दिन में कई जिंदगियां खत्म हो गईं।

फेडरेशन ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में बन रहे बड़े पावर प्लांट्स में सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा निजी कंपनियों और आउटसोर्स एजेंसियों को सौंप दिया गया है। इससे लागत कम करने के नाम पर सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा रहा है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि भारत सरकार के केंद्रीय बॉयलर बोर्ड ने भी निरीक्षण व्यवस्था में आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया है, जिससे स्थायी निरीक्षकों की संख्या घट गई है। ऐसे में बॉयलर और स्टीम सिस्टम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कमजोर पड़ रही है।

हिंद मजदूर खदान फेडरेशन ने मांग की है कि—

  • वेदांता प्लांट हादसे की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जाए।
  • सभी थर्मल पावर प्लांट्स में सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
  • आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर स्थायी निरीक्षकों की नियुक्ति हो।
  • हादसे में मृत श्रमिकों के परिवारों को उचित मुआवजा और घायलों को बेहतर उपचार दिया जाए।

अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि “जो मजदूर इस हादसे में जान गंवा चुके हैं, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए अभी ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। यही मृतकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”




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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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